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युद्ध स्मारक पर स्थापित होगा वायु सेना के शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान


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वायु सेना के शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान अब गढ़ी कैंट के चीड़बाग में निमार्णाधीन युद्ध स्मारक (शौर्य स्थल) की शान बढ़ाएगा। रविवार को विमान यहां पहुंच गया है। जिसे विधिवत पूजा अर्चना के बाद युद्ध स्मारक पर उतारा गया।

छावनी परिषद देहरादून की मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन ने कैंट बोर्ड कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि देश के सैन्य इतिहास में देवभूमि के रणबांकुरों के शौर्य के असंख्य किस्से दर्ज हैं। उनके इस अदम्य साहस और बलिदान के प्रतीक के रूप में पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय की पहल पर युद्ध स्मारक की नींव रखी गई थी। युद्ध स्मारक में मिग-21 रखने का प्रस्ताव करीब दो साल पहले कैंट बोर्ड की बैठक में पास हुआ था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया के विशेष प्रयास से विमान यहां पहुंच गया है।

इधर, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं युद्ध स्मारक के अध्यक्ष तरुण विजय ने बताया कि देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए तैयार हो रहे शौर्य स्थल में नभ, जल और थल तीनों सेनाओं की निशानियां रखी जानी हैं। मिग-21 दून पहुंच गया है। युद्ध स्मारक की शान बढ़ाने के लिए चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) विपिन रावत की ओर से दो राइफल पहले ही दी जा चुकी हैं। इसके अलावा नौ सेना के साहस के प्रतीक के रूप में एक जहाज की सिफारिश भी रक्षा मंत्रालय से की गई है।

भारत में मिग 21 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल 1964 से शुरू हुआ है। ये इकलौता ऐसा विमान है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के करीब 60 देशों ने किया है। मिग 21 एविएशन के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक संख्या में बनाया गया सुपरसोनिक फाइटर जेट है। पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग 21 ने मुख्य भूमिका निभाई थी। मिग 21 लड़ाकू विमान की रफ्तार 2229 किमी प्रति घंटा की है। इसमें टर्बोजेट इंजन लगा हुआ है, जो विमान को सुपरसोनिक रफ्तार देता है।